1200 करोड़ रुपये मांगे तो केंद्र ने कहा जरूरत नहीं: पराली को लेकर पंजाब प्लान पर केंद्र ने दिया झटका
पंजाब सरकार ने केंद्र से पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए 1200 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मांगी थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है। यह निर्णय पंजाब के किसानों के लिए एक बड़ा झटका है, जो हर साल कृषि अवशेषों के जलने से होने वाले प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
पराली जलाने का संकट
पंजाब में हर साल धान की कटाई के बाद किसानों द्वारा पराली जलाने की घटना तेजी से बढ़ती जा रही है। इस पराली जलाने से न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि यह मिट्टी की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है। केंद्रीय सरकार ने पहले भी राज्य सरकार को कई योजनाएं और तकनीकी मदद देने का आश्वासन दिया था, लेकिन आर्थिक मदद के मामले में उनकी चुप्पी ने पंजाब सरकार को निराश किया है।
केंद्र का तर्क
केंद्र सरकार ने अपने निर्णय में कहा कि पंजाब को पहले से ही कई योजनाओं के तहत सहायता मिल रही है और इस समय और धन की आवश्यकता नहीं है। केंद्र ने यह भी कहा कि कृषि के क्षेत्र में दी जा रही सहायता का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, और इसलिए अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता नहीं है।
पंजाब सरकार की प्रतिक्रिया
पंजाब सरकार ने केंद्र के इस निर्णय पर नाखुशी जताई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, “हमारे किसान रोजाना इस समस्या का सामना कर रहे हैं, और केंद्र की इस असहयोगी नीति से हमें निराशा हुई है। अगर हमें समय पर मदद नहीं मिलेगी, तो यह समस्या और भी विकराल हो जाएगी।”
किसानों की चिंता
पंजाब के किसान संगठनों ने केंद्र के निर्णय की कड़ी निंदा की है और कहा है कि इससे न केवल किसानों का आर्थिक बोझ बढ़ेगा, बल्कि यह प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में भी एक बड़ा बाधा साबित होगा। उन्होंने मांग की है कि केंद्र को इस मामले में गंभीरता से विचार करना चाहिए और तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान करनी चाहिए।


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